आगरा की एसीजेएम-10 कोर्ट में दृष्टि आईएएस कोचिंग के प्रबंध निदेशक विकास दिव्यकीर्ति के खिलाफ मंगलवार को मानहानि परिवार को प्रकीर्ण वाद (miscellaneous case) में दर्ज किया गया है. आगरा के अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने आपराधिक मानहानि का परिवाद दायर किया. वाद में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को आधार बनाया गया है. जिसमें विकास दिव्यकीर्ति ने हाइकोर्ट, जिला जज व अधिवक्ताओं के लिए काफी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया है.
अजय प्रताप सिंह ने कोर्ट को बताया कि वायरल वीडियो में विकास दिव्यकीर्ति कह रहे है कि ‘हाइकोर्ट में 50% जज सीधे अधिवक्ता नियुक्ति किये जाते हैं. इसके लिए बस जुगाड़ चाहिए. वैकेंसी भी दो से तीन में एक आती है, इसके लिए गिद्ध 500 होते है. डिस्ट्रिक्ट जज कहें तो डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को डांट सकता है. अकेले में डांट खा भी लेता होगा. डिस्ट्रिक्ट जज पावरफुल है, लेकिन डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट जितना नहीं. न्यायपालिका की सारी ताकत इस भरोसे पर है कि एसपी मेरी बात मानेगा, जज बोलेगा अरेस्ट करो एसपी बोलेगा नहीं खुद ही कर लो. सारी ताकत खत्म. बड़ी सिंपल सी बात है कि एसपी है उसने एक अपराधी को पकड़ा और वह कल जमानत के लिए जा रहा है. बहुत तगड़ा वकील लेकर गया है. दिल्ली से और एसपी को पता है इसे छोड़ना ठीक नहीं रहेगा’.
वायरल वीडियो में दिव्यकीर्ति कह रहे है कि ‘मैंने सुना है कि एसपी साहब रात को डीजे साहब को फोन कर देते हैं. कौन डीजे? डीजे वाले बाबू नहीं डिस्ट्रिक्ट जज, बताते हैं सर ऐसे मामला है. बहुत ही खतरनाक क्रिमनल है. हमारे पास एविडेन्स हैं. आई रिक्वेस्ट यू प्लीज डोंट गिव हिम बेल, जनरली उसके बाद बेल नहीं मिलती’. परिवाद को प्रकीर्ण वाद में दर्ज करने का आदेशःअधिवक्ता अजय प्रताप सिंह का आरोप है कि विकास दिव्यकीर्ति ने अधिवक्ताओं के लिए गिद्ध शब्द का प्रयोग किया और उनकी भाषा माननीय हाइकोर्ट, माननीय जिला जज महोदय की मर्यादा के विरुद्ध है. जोकि मानहानि कारक है. इसलिये परिवाद दायर किया. माननीय न्यायालय ने सुनवाई करके परिवाद को प्रकीर्ण वाद (miscellaneous case) में दर्ज करने का आदेश जारी किया. इस दौरान सुनवाई के दौरान न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश सिकरवार, एसपी सिंह सिकरवार व राहुल सोलंकी उपस्थित रहे.
